Thursday, 20 June 2013


गीत "तेरी ओर " से प्रेरित ....
 
मेरी ओर 
 
क्यों खो गया , हो गया किसी का ,
जब सस्ता मिल गया , जो किसी का ,
पैरों में है पड़ा , किसी का ,
अब सस्ता मिल गया , जो किसी का ,
मिलता नया डब्बा , पानी चू रहा है ,
पीछे मेरे कोई न हो और ...

 
मेरी ओर, मेरी ओर, मेरी ओर, मेरी ओर, माय डब्बा , मेरी ओर, मेरी ओर, मेरी ओर
मेरी ओर, मेरी ओर, मेरी ओर, मेरी ओर, माय डब्बा , मेरी ओर, मेरी ओर, मेरी ओर
 
खुलती हैं तारें , बढ़ती जब दूरियां ,
सर पे वही है आसमान ,
चारों दिशायें , देख कर जो जाएँ ,
क्यूँ अब हुए हम परेशान  , 
ऐं ... हमें तो यही डब्बा ,
कसम से मिला है ,
पास में नहीं, कोई और, कोई और ...
 
मेरी ओर, मेरी ओर, मेरी ओर, मेरी ओर, माय डब्बा , मेरी ओर, मेरी ओर, मेरी ओर
मेरी ओर, मेरी ओर, मेरी ओर, मेरी ओर, माय डब्बा , मेरी ओर, मेरी ओर, मेरी ओर
 
एक लकीर थी , और था एक बाजा ,
कहते हैं मेरी राहों में ,
बचा जो वक़्त तो , सौ मुश्किलें हों ,
रुकता मैं हर मोड़ पे ,
हो हो , मनचला मेरा डब्बा ,
कलंक बन गया है ,
अब इसका नहीं ओर , कोई चोर ...
 
मेरी ओर, मेरी ओर, मेरी ओर, मेरी ओर, माय डब्बा , मेरी ओर, मेरी ओर, मेरी ओर
मेरी ओर, मेरी ओर, मेरी ओर, मेरी ओर, माय डब्बा , मेरी ओर, मेरी ओर, मेरी ओर
 
क्यों खो गया, हो गया किसी का ,
जब सस्ता मिल गया , जो किसी का ,
हाथों में है आ गया, किसी का ,
फिर से नया डब्बा , फिर भी पानी चू रहा है ,
फेंके उसे कोई और , मेरी ओर ...
 
मेरी ओर, मेरी ओर, मेरी ओर, मेरी ओर, माय डब्बा , मेरी ओर, मेरी ओर, मेरी ओर
मेरी ओर, मेरी ओर, मेरी ओर, मेरी ओर, माय डब्बा , मेरी ओर, मेरी ओर, मेरी ओर

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