Thursday, 20 June 2013

इन पंक्तियों का श्रेय जाता है, मेरे सहकर्मी श्री धर्मेन्द्र कुमार, जिनकी गाने की रूचि एवं सकारात्मक प्रयास से मैं इन पंक्तियों पर विमर्श कर सका और इन्हें आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ ...
 
ये है दिल्ली, हर कोई परेशान

ये है दिल्ली, यहाँ हर एक परेशान ,
ज़रा भूख से, ज़रा दर्द से, ये है दिल्ली मेरी जान ...
हाय हाय , अरे रे रे , हाय रे हाय ,
डम डम डम, डम डम डम, डम डम डम ,
ये  है दिल्ली, यहाँ हर एक परेशान ,
ज़रा भूख से, ज़रा दर्द से, ये है दिल्ली मेरी जान ...

(कहीं ऑडी, कहीं टाटा, कहीं रेनौ, कहीं फ़िएट ,
यहाँ चलती हर गाडी, बस चलती नहीं किस्मत) - 2
ख़त्म न हो कोई मुश्किल, हर मानुष परेशान ,
ज़रा भूख से, ज़रा दर्द से, ये है दिल्ली मेरी जान ...
 
( या हो डॉक्टर, या हो लॉयर, या नेता या पुलिस ,
बस इनकी है चलती, बाकी सबकी टाएँ-टाएँ फिस ) - 2
काम करने को न राज़ी, रिश्वत ही का नाम-ओ-निशाँ ,
 ज़रा भूख से, ज़रा दर्द से, ये है दिल्ली मेरी जान ...

चार्ज करना ज़रा ज्यादा, यहाँ सब का है हक़ ,
मोल-भाव नहीं करते, रहे फिक्स्ड प्राइस ही तक ...
एक ही चीज़ के हैं, कई दाम यहाँ ,
ज़रा भूख से, ज़रा दर्द से, ये है दिल्ली मेरी जान ...

हर बात पर करना तू -तू  मैं-मैं ,
न तुझे न मुझे मिलता कहीं चैन ,
तकदीर बनती कुछ की ही, बाकी हैं परेशान ...
ज़रा भूख से, ज़रा दर्द से, ये है दिल्ली मेरी जान ...

ये है दिल्ली, यहाँ हर एक परेशान ,
ज़रा भूख से, ज़रा दर्द से, ये है दिल्ली मेरी जान ...
सुनो बैरिस्टर , सुनो साधू, ये है दिल्ली मेरी जान ...
ये है दिल्ली, यहाँ हर एक परेशान ,
ज़रा भूख से, ज़रा दर्द से, ये है दिल्ली मेरी जान ...

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